राजस्थान के हिण्डौन सिटी में 50 से अधिक कमर्शियल संस्थानों को नोटिस थमाकर तत्काल फायर सेफ्टी उपाय करने को कहा गया है। लेकिन, कथित तौर पर अधिकारियों से सांठ-गांठ के कारण ये नोटिस धूल फांक रहे हैं और हजारों नागरिकों की जान दांव पर लगी हुई है।
हिण्डौन सिटी। दिल्ली की एक होटल और बिहार के मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में भीषण आग लगने से हुई 26 मासूम लोगों की मौत की गूंज अभी थमी भी नहीं है। देश भर में इन हादसों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन हिण्डौन सिटी के जिम्मेदार प्रशासनिक महकमों की नींद पूरी तरह टूटने का नाम नहीं ले रही है।
वर्तमान में हिण्डौन सिटी में सैकड़ों की संख्या में आलीशान होटल, नामी कोचिंग संस्थान, खचाखच भरी रहने वाली लाइब्रेरी, अस्पताल, शॉपिंग मॉल और बड़े व्यावसायिक संस्थान धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। मगर इन वीआईपी बिल्डिंग्स में सुरक्षा के दावों की पोल खोलती फायर एनओसी (Fire NOC) के आंकड़े ऊंट के मुंह में जीरा जैसे नजर आ रहे हैं। अकेली हिण्डौन नगर परिषद के सरकारी दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि मार्च 2025 से मई 2026 तक के पूरे सवा साल के भीतर समूचे शहर में महज 37 संस्थानों को ही फायर एनओसी जारी की गई है। बाकी के सैकड़ों संस्थान बिना किसी अग्नि सुरक्षा प्रमाणन के, मौत का जाल बुनकर खुलेआम चल रहे हैं।
100 बड़े संस्थानों में नियमों का मखौल
हाल ही में जब चौतरफा दबाव के बाद नगर परिषद की टीम ने शहर के 100 से अधिक बड़े और नामी व्यावसायिक संस्थानों का गुपचुप सर्वे किया, तो जो हकीकत सामने आई वह होश उड़ाने वाली थी। इनमें से एक बड़ी तादाद ऐसे संस्थानों की थी जो बिना किसी वैध फायर एनओसी के चल रहे थे। नगर परिषद के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक आनन-फानन में इनमें से 50 से अधिक डिफाल्टर संस्थानों को नोटिस थमाकर तत्काल फायर सेफ्टी सिस्टम इंस्टॉल करने और एनओसी लेने के कड़े निर्देश दिए गए।
अग्नि शमन विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि आग लगने पर एक छोटी सी लापरवाही की चिंगारी महज चंद मिनटों में विकराल काल का रूप ले लेती है। इसके बावजूद हिण्डौन के कई रसूखदार संचालक फायर सेफ्टी और एनओसी को महज कागजी औपचारिकता मानकर हवा में उड़ा रहे हैं।
जिला अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर
इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली हकीकत शहर के सरकारी दावों की रीढ़ माने जाने वाले जिला चिकित्सालय में देखने को मिली है। हिण्डौन सिटी का यह जिला अस्पताल न केवल उपखंड बल्कि पूरे जिले का सबसे बड़ा लाइफलाइन सेंटर माना जाता है। यहाँ रोजाना औसतन 3 से 4 हजार मरीज और उनके परिजन गंभीर अवस्था में इलाज और परामर्श के लिए पहुँचते हैं।
लेकिन विडंबना देखिए कि यहाँ भी अब तक अपडेटेड फायर सेफ्टी सिस्टम स्थापित नहीं किया जा सका है। नगर परिषद प्रशासन की ओर से जिला अस्पताल प्रबंधन को अब तक दो बार आधिकारिक नोटिस जारी कर चेताया जा चुका है, लेकिन सरकारी तंत्र के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर खतरे को लेकर पूरी तरह बेपरवाह बने हुए हैं।
किन-किन पर लटकी है नोटिस की तलवार?
नगर परिषद द्वारा जिन 50 से अधिक रसूखदार व्यावसायिक संस्थानों की सूची बनाकर नोटिस थमाए गए हैं, उनमें शहर के निम्नलिखित नामी प्रतिष्ठान शामिल हैं:
- निजी स्कूल: करीब 15 से 20 नामी प्राइवेट स्कूल, जहां रोजाना हजारों बच्चों का भविष्य बैठता है।
- पेट्रोल पंप व मैरिज गार्डन: 7 बड़े पेट्रोल पंपและ 12 आलीशान मैरिज गार्डन।
- अस्पताल व कोचिंग: 2 बड़े निजी अस्पताल, दर्जनों शॉपिंग मॉल, खचाखच भरी लाइब्रेरी और नामी कोचिंग संस्थान।
इन नोटिसों को तामील हुए कई दिन बीत चुके हैं, पर संस्थान मालिकों और प्रबंधकों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
क्यों खामोश बैठ जाती है नगर परिषद?
शहर के गलियारों और प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो इस लापरवाही के पीछे एक बड़ा भ्रष्टाचार और सांठ-गांठ का खेल चल रहा है। फायर सेफ्टी सिस्टम लगवाने के भारी-भरकम खर्च और एनओसी की सरकारी कागजी प्रक्रियाओं में उलझने के बजाय, इन व्यावसायिक संस्थानों के मालिक सीधे तौर पर नगर परिषद के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क साध लेते हैं।
इस सांठ-गांठ के चलते फाइलों को दबाने और लेट-लतीफी का एक अंतहीन दौर शुरू हो जाता है। नतीजा यह होता है कि धरातल पर कभी फायर सेफ्टी सिस्टम लग ही नहीं पाता। जनता अब पूछ रही है कि क्या नगर परिषद प्रशासन हादसों को रोकने के लिए अपना यह कथित लचीलापन छोड़कर इन लापरवाह और रसूखदार संस्थान मालिकों के खिलाफ कोई सख्त कानूनी एक्शन (जैसे सीलिंग या भारी जुर्माना) लेगा, या फिर हिण्डौन में भी किसी बड़ी मानव निर्मित त्रासदी का इंतजार किया जा रहा है?
सरकारी आंकड़ों का आईना: हिण्डौन में महज इतनी एनओसी
नगर परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार पूरे शहर में सिर्फ उंगलियों पर गिनने लायक संस्थानों के पास ही अधिकृत रूप से वैध फायर एनओसी है। नीचे दी गई तालिका से स्थिति स्पष्ट होती है:
| संस्थान का प्रकार | एनओसी प्राप्त संस्थानों की संख्या |
|---|---|
| अस्पताल | 15 |
| होटल / बीयर बार / कॉलेज | 05 (प्रत्येक श्रेणी में) |
| पेट्रोल पंप | 03 |
| शॉपिंग मॉल | 02 |
| मैरिज गार्डन / स्कूल | 01 (प्रत्येक श्रेणी में) |
जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों का पक्ष
“होटल, अस्पताल से लेकर सभी व्यावसायिक परिसरों में फायर सेफ्टी सिस्टम लगाना पूरी तरह अनिवार्य है। शहर में बड़ी संख्या में ऐसे डिफाल्टर संस्थान चिह्नित किए गए हैं, जिनके पास पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। हम 50 संस्थानों को पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं। अब इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और जल्द ही सख़्ती से सीलिंग की कार्रवाई शुरू होगी। मेरी अपील है कि सभी संस्थान मालिक जल्द से जल्द एनओसी प्राप्त कर लें।”
“जिला अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए नगर परिषद में फाइल पहले ही लगाई जा चुकी है। अस्पताल के नए भवन में तो आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह एक्टिव है, लेकिन पुरानी बिल्डिंग में सिस्टम लगाने के लिए वित्तीय स्वीकृति हेतु मुख्यालय को एस्टीमेट (तकमीना) बनाकर भिजवाया गया है। वर्तमान में हमारे पास पर्याप्त मात्रा में पोर्टेबल अग्निशमन यंत्र (फायर एक्स्टिंग्विशर) उपलब्ध हैं।”
