हिंदुत्व ही रखेगा विश्वबंधुत्व की आधारशिला : वक्ता

खंडार | सिंगौर कलां

खंडार खंड के सिंगौर कलां मंडल में रविवार को विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता, पंच परिवर्तन और हिन्दू समाज की एकता को सुदृढ़ करना रहा।

🔹 कलश यात्रा से हुई शुरुआत – कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः गांव की गौशाला से गीता भवन तक निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुई। इस यात्रा में बालिकाओं, महिलाओं, पुरुषों एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्मेलन पांडाल पहुंचने पर राम भक्ति गीतों का सामूहिक गायन किया गया।

🔹 संतों की गरिमामयी उपस्थिति – कार्यक्रम के दौरान मंच पर संत श्री महाराज विराजमान रहे। उनके सान्निध्य में सम्मेलन आध्यात्मिक एवं वैचारिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

🔹 मुख्य वक्ता का उद्बोधन – मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह जिला कार्यवाह नीरज जी ने कहा कि—अब तक विभिन्न जातियों के सम्मेलन होते रहे हैं, लेकिन सिंगौर मंडल में पहली बार सर्व समाज का विशाल हिन्दू सम्मेलन आयोजित होना सौभाग्य की बात है।भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां देश को ‘मां’ कहकर पुकारा जाता है। मातृभूमि की अखंडता और अक्षुण्णता बनाए रखने के लिए हिन्दू समाज का संगठित रहना अनिवार्य है।

उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि—1857 की क्रांति के समय भारत का क्षेत्रफल लगभग 83 लाख वर्ग किलोमीटर था, जो विभाजन के बाद सिमटकर लगभग 33 लाख वर्ग किलोमीटर रह गया।विशाल आर्यावर्त को तोड़कर बने अनेक देश आज अपनी पहचान और स्थायित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

🔹 जातिभेद पर स्पष्ट संदेश – वक्ता ने कहा कि—जातिभेद हिन्दू धर्म का मूल नहीं, बल्कि बाद में उत्पन्न हुई परिस्थितिजन्य बुराई है।भारतीय संस्कृति प्रारंभ से ही कर्मप्रधान, समावेशी और सहयोगात्मक रही है।केवल अधिकारों की नहीं, बल्कि कर्तव्यों की भावना से ही समाज और राष्ट्र विकसित हो सकता है।

🔹 पंच परिवर्तन का आह्वान – मुख्य वक्ता ने समाज में पंच परिवर्तन को अपनाने का आह्वान किया—नागरिक कर्तव्यपर्यावरण संरक्षणसामाजिक समरसतास्व-अतीत का बोधकुटुंब प्रबोधनउन्होंने कहा कि इन्हीं परिवर्तनों के माध्यम से उत्कृष्ट समाज और प्राचीन संस्कृति की पुनर्स्थापना संभव है।

🔹 संत श्री महाराज का संदेश – संत श्री महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा—हिन्दू समाज सदैव दयालु और समावेशी रहा है, लेकिन कोई इसे कमजोरी समझकर तोड़ने का प्रयास न करे।जैसे पेड़ की जड़ों में पानी देने से वह हरा-भरा रहता है, वैसे ही भारत के मूल समाज—हिन्दू समाज को सशक्त करना आवश्यक है।उन्होंने गौ माता की पूजा और संरक्षण की महिमा का शास्त्रसम्मत वर्णन किया।

🔹 बड़ी संख्या में सहभागिता – सम्मेलन में आसपास के गांवों से सैकड़ों महिला-पुरुषों ने भाग लिया। प्रेरणादायी उद्बोधनों से उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा और सामाजिक चेतना का संचार हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!