बांसवाड़ा/जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के वनाच्छादित क्षेत्रों को आर्थिक रूप से समृद्ध और वैश्विक पहचान दिलाने के लिए एक महत्वाकांक्षी ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ पर मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप, राजस्थान के तीन दक्षिणी जिलों— बांसवाड़ा, उदयपुर और सिरोही का चयन ‘चंदन वन’ विकसित करने के लिए किया गया है। यह कदम न केवल राजस्थान के पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को बदलेगा, बल्कि भविष्य में राज्य के राजस्व का एक बड़ा स्रोत भी बनेगा।

1. मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट: तीन जिलों में ‘चंदन क्रांति’

राजस्थान वन विभाग ने इस वृहद परियोजना के लिए भूमि का चयन कर लिया है। सरकार की योजना इन चुनिंदा क्षेत्रों में सघन चंदन के वन विकसित करने की है।

  • बांसवाड़ा: यहाँ के झातलिया वनखंड (घंटाला रेंज) में 25 हेक्टेयर भूमि पर चंदन के वृक्ष लगाए जाएंगे।
  • उदयपुर: कालका माता वनखंड में 22 हेक्टेयर क्षेत्र को ‘चंदन वन’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • सिरोही: पिंडवाड़ा क्षेत्र के 30 हेक्टेयर भूभाग पर चंदन की खुशबू महकेगी।

इन तीनों जिलों में कुल मिलाकर लगभग 77 हेक्टेयर में चंदन की खेती सरकारी स्तर पर शुरू की जा रही है।

2. प्रति वनखंड 10,000 पौधे: जून में होगा महा-रोपण

परियोजना के तकनीकी पक्ष के अनुसार, प्रत्येक चयनित वनखंड में 10,000 सफेद चंदन के पौधे लगाए जाएंगे। यानी पहले चरण में राजस्थान में कुल 30,000 चंदन के वृक्ष तैयार करने का लक्ष्य है।

  • मानसून की तैयारी: वन विभाग ने सभी डीएफओ (DFO) को निर्देश दिए हैं कि मानसून की पहली बारिश से पहले गड्ढों की खुदाई, फेंसिंग (घेराबंदी) और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए जाएं।
  • बाहर से आएंगे पौधे: अच्छी गुणवत्ता वाले चंदन के पौधे विशेष रूप से उन राज्यों से मंगाए जा रहे हैं जहाँ चंदन की पैदावार पहले से ही सफल है।

3. चंदन का वैज्ञानिक रहस्य: ‘होस्ट प्लांट’ की अनिवार्यता

चंदन का पेड़ अन्य पेड़ों की तुलना में काफी अलग होता है। वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, चंदन एक अर्द्ध-पराजीवी (Semi-Parasitic) पेड़ है।

  • भोजन का तरीका: चंदन का पौधा अपने शुरुआती विकास के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं होता। इसे अपने अंकुरण और पोषण के लिए दूसरे पौधों की जड़ों की आवश्यकता होती है, जिन्हें ‘होस्ट प्लांट’ कहा जाता है।
  • राजस्थान की रणनीति: राजस्थान में चंदन के साथ मूंग, अरहर, हेज, मेहंदी और करंज के पौधे लगाए जाएंगे। चंदन की जड़ें इन पौधों से अपना भोजन और खनिज तत्व सोखेंगी।

4. वन मंत्री का धरातलीय निरीक्षण

परियोजना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद वन मंत्री इस ड्रीम प्रोजेक्ट की साइट्स का दौरा कर रहे हैं। बांसवाड़ा के झांतलिया वनखंड में साइट निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जून के अंतिम सप्ताह तक वृक्षारोपण का कार्य हर हाल में शुरू हो जाना चाहिए।

5. आर्थिक और पर्यावरणीय दूरदर्शिता

चंदन की लकड़ी दुनिया की सबसे महंगी लकड़ियों में शुमार है।

  • राजस्व: एक पूर्ण विकसित चंदन का पेड़ 12 से 15 साल में तैयार होता है। राजस्थान सरकार का लक्ष्य इसे एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखना है।
  • पर्यटन: कर्नाटक के मैसूर की तरह राजस्थान के ये ‘चंदन वन’ भविष्य में ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) के बड़े केंद्र बन सकते हैं।

The Xposure News Fact-Check Box

प्रोजेक्ट: राजस्थान चंदन वन विकास (ड्रीम प्रोजेक्ट)

जिले: बांसवाड़ा, उदयपुर, सिरोही

कुल पौधे: 30,000 (प्रथम चरण)

तकनीक: होस्ट प्लांट आधारित वृक्षारोपण


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