पांचना बांध के कमांड क्षेत्र में तुरंत पानी छोड़ने का हाईकोर्ट का ‘अंतिम आदेश’— लापरवाही पर अफसरों की कोर्ट में होगी पेशी!

1. हाईकोर्ट की बेंच का सख्त रुख
गंगापुर सिटी विधायक रामकेश मीना के द्वारा लगायी गयी जनहित याचिका संख्या C.W. 12479/2022 एवं PIL-400 पर सुनवाई करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश श्री एस. पी. शर्मा एवं श्रीमती शुभा मेहता की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा आदेश पारित किया है।
अल्टीमेटम: कोर्ट ने आदेश की पालना (Compliance) के लिए अगली तारीख 01 मई 2026 तय की है। यदि इस तिथि तक पानी नहीं छोड़ा गया, तो चीफ इंजीनियर और सचिव (जल संसाधन विभाग) को स्वयं न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

2. राजनीति और हठधर्मिता की भेंट चढ़ा बांध
प्रकरण में यह बात सामने आई है कि पांचना बांध वर्ष 2005 से ही स्थानीय राजनीति का शिकार हो रहा है।
- भीषण संकट: इस भीषण गर्मी में न केवल किसान सिंचाई के लिए तरस रहे हैं, बल्कि पशु-पक्षियों और जंगली जानवरों के लिए भी पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
- प्रशासनिक लापरवाही: कोर्ट में विद्वान वकील विकास सैनी द्वारा दी गई दलीलों में बताया गया कि जल वितरण समिति (Water Distribution Committee) ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है।

3. अधिकारियों की संवेदनहीनता पर सवाल
याचिकाकर्ता द्वारा कोर्ट को अवगत कराया गया कि संभागीय आयुक्त, भरतपुर (समिति अध्यक्ष) और जिला कलेक्टर करौली व सवाई माधोपुर (सदस्य) होने के बावजूद, जल वितरण समिति की बैठकें आयोजित नहीं की गईं। प्रशासन के इस नकारात्मक रवैये और सरकार की संवेदनहीनता के कारण हजारों किसान पानी से महरूम हैं। विधानसभा में प्रश्न लगाने और मंत्रियों के आश्वासनों के बाद भी धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
4. कानून-व्यवस्था और किसानों की राहत
अब मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी पत्र लिखकर इस अदालती आदेश से अवगत कराया गया है। मांग की गई है कि शांति व्यवस्था बनाए रखते हुए तुरंत नहरों में पानी छोड़ा जाए ताकि क्षेत्र के किसानों को आर्थिक और मानसिक राहत मिल सके।
The Xposure News Fact-Check Box
याचिका संख्या: C.W. 12479/2022 | PIL-400
न्यायाधीश: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस. पी. शर्मा एवं श्रीमती शुभा मेहता
प्रभावी तिथि: 23 अप्रैल 2026
अगली डेडलाइन: 01 मई 2026 (अधिकारियों की पेशी की संभावना)
