जयपुर/सीकर। राजस्थान के बहुचर्चित अरबों रुपए के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में राजस्थान हाईकोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस महाघोटाले में शामिल 4 प्रमुख आरोपियों की जमानत याचिकाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत के इस कड़े रुख से साफ है कि सरकारी टेंडरों में फर्जीवाड़ा करने वालों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिलने वाली है। हालांकि, कोर्ट ने इसी मामले के एक अन्य आरोपी को केवल खराब स्वास्थ्य (Medical Grounds) के आधार पर सशर्त जमानत का लाभ दिया है।
क्या है पूरा महाघोटाला? (The JJM Scam Background)
यह पूरा मामला राजस्थान जलदाय विभाग (PHED) में जल जीवन मिशन (हर घर जल योजना) के तहत हुए करीब 979.27 करोड़ रुपए के टेंडर आवंटन में हुई भारी अनियमितताओं, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
इस घोटाले की परतें तब खुलीं जब जांच एजेंसियों (ACB और ED) ने पाया कि कई रसूखदार ठेकेदारों और निजी कंपनियों ने सरकारी टेंडर हथियाने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र (Fake Experience Certificates) और फर्जी कार्य निष्पादन प्रमाण पत्र (Performance Certificates) तैयार किए थे। इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे पीएचईडी विभाग के आला अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपए के टेंडर अवैध रूप से पास करा लिए गए। इस मामले में पूर्व जलदाय मंत्री और कई बड़े प्रशासनिक व तकनीकी अधिकारियों के नाम लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।
हाईकोर्ट में हुई तीखी बहस, कोर्ट ने रुख किया कड़ा
न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में बंद आरोपियों की तरफ से राजस्थान हाईकोर्ट में नियमित जमानत के लिए याचिकाएं दायर की गई थीं। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी और सरकारी वकीलों ने कोर्ट के सामने पुख्ता दलीलें रखीं कि यह जनता के पैसे और पानी जैसी बुनियादी सुविधा से जुड़ा एक बेहद गंभीर और संगठित टेंडर घोटाला है। यदि आरोपियों को जमानत दी गई, तो वे केस के अहम तकनीकी दस्तावेजों और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
- इन 4 आरोपियों को लगा तगड़ा झटका: हाईकोर्ट ने मामले में शामिल चार मुख्य आरोपियों की दलीलों को पूरी तरह से नकारते हुए उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इन आरोपियों को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।
- सिर्फ एक आरोपी को मिली ‘मानवीय’ राहत: इसी मामले में बंद आरोपी अरुण श्रीवास्तव को अदालत से राहत मिल गई है। अरुण श्रीवास्तव के वकीलों ने उनकी गंभीर बीमारी और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए मेडिकल ग्राउंड पर जमानत की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण और स्वास्थ्य कारणों को ध्यान में रखते हुए अरुण श्रीवास्तव की सशर्त जमानत याचिका स्वीकार कर ली और उन्हें रिहा करने के आदेश जारी किए।
लगातार जारी है जांच की आंच
राजस्थान का यह जल जीवन मिशन घोटाला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से लगातार छापेमारी और संपत्तियां कुर्क करने की कार्रवाई कर रही है। हालांकि पूर्व में इस मामले से जुड़े कुछ सह-आरोपियों जैसे सुनील दत्त और पीयूष जैन को उच्च अदालतों से राहत मिल चुकी है, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा इन चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज होना इस टेंडर फर्जीवाड़े को लेकर अदालतों के कड़े रुख को दर्शाता है।
टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी मापदंडों और नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के इस खेल में हाईकोर्ट की यह सख्ती अन्य आरोपियों और संदिग्धों के लिए भी एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
