प्रशासनिक समीक्षा के बाद गंगापुर सिटी भले ही जिला नहीं रहा, लेकिन जिला सतर्कता समिति में यहाँ के नेताओं को मिली सबसे बड़ी चाबी।

गंगापुर सिटी / सवाई माधोपुर।

राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जनसुनवाई को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक कदम उठाया है। सरकार द्वारा जारी नवीनतम आदेश के तहत ‘जिला जन अभियोग एवं सतर्कता समिति, सवाई माधोपुर’ (District Public Grievances and Vigilance Committee) में चार प्रमुख चेहरों को गैर-सरकारी सदस्य (Non-Official Members) मनोनीत किया गया है।

इस मनोनयन का सबसे दिलचस्प और तार्किक पहलू यह है कि मनोनीत किए गए सभी चारों चेहरे—गंगापुर सिटी नगर परिषद के सभापति शिवरतन अग्रवाल, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सुशील दीक्षित, गंगापुर सिटी की प्रधान मंजू गुर्जर और भाजपा मोर्चा संयोजक जमना लाल वैष्णव—मूलतः गंगापुर सिटी क्षेत्र से ही आते हैं।

चूंकि प्रशासनिक समीक्षा के बाद गंगापुर सिटी अब स्वतंत्र जिला नहीं है और वह सवाई माधोपुर जिले का ही एक ब्लॉक/उपखंड है, ऐसे में पूरे जिले की इस बेहद पावरफुल सतर्कता समिति में सिर्फ गंगापुर सिटी क्षेत्र के नेताओं को इतना बड़ा प्रतिनिधित्व मिलना सियासी गलियारों में गहरी चर्चा का विषय बन गया है।


समझिए: आखिर क्या है ‘जिला जन अभियोग एवं सतर्कता समिति’?

आम जनता के लिए यह जानना जरूरी है कि यह समिति सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जिला-स्तरीय कमेटियों में से एक है। राजस्थान सरकार के जन अभियोग निराकरण विभाग (Department of Public Grievances Redressal) के नियमों के तहत हर जिले में इसका गठन किया जाता है।

इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
सीधे शब्दों में कहें तो, जब आम जनता की सुनवाई निचले स्तर के सरकारी दफ्तरों (जैसे बिजली विभाग, जलदाय विभाग, तहसील, ब्लॉक ऑफिस या पुलिस थाना) में नहीं होती और अफसरशाही हावी होने लगती है, तब यह समिति एक ‘अदालत’ की तरह काम करती है। यह जनता की शिकायतों को सीधे जिला स्तर पर सुनती है और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करती है।

समिति का ढांचा: कौन होता है अध्यक्ष और कौन सदस्य?

सरकारी नियमों के अनुसार, इस समिति का गठन सरकारी (पदेन) और गैर-सरकारी (मनोनीत) सदस्यों को मिलाकर एक संतुलित बोर्ड के रूप में किया जाता है:

  • समिति के अध्यक्ष: नियमों के तहत, जिले के कलेक्टर (District Collector, सवाई माधोपुर) इस समिति के पदेन अध्यक्ष होते हैं। पूरी बैठक उन्हीं की देखरेख में चलती है।
  • पदेन सरकारी सदस्य: जिले के पुलिस अधीक्षक (SP), जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और सवाई माधोपुर जिले के सभी बड़े विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी इसके स्थायी सदस्य होते हैं।
  • गैर-सरकारी सदस्य: सरकार द्वारा मनोनीत किए जाने वाले राजनीतिक या सामाजिक कार्यकर्ता (जैसे हाल ही में मनोनीत गंगापुर सिटी के ये चार सदस्य)। ये लोग जनता और जिला प्रशासन के बीच की कड़ी का काम करते हैं।

इस समिति के मुख्य काम और अधिकार क्या हैं?

इस समिति को राजस्थान सरकार ने व्यापक प्रशासनिक अधिकार दिए हैं:

  1. फाइलें खोलने का अधिकार: समिति के सदस्य कलेक्टिवेट की बैठक में किसी भी विभाग की फाइल खुलवा सकते हैं और संबंधित अधिकारी से सीधे जवाब-तलब कर सकते हैं।
  2. लापरवाही पर जांच: बिजली, पानी, सड़क या नगर परिषद में लंबित पड़े भ्रष्टाचार या आम जनता को परेशान करने वाले मामलों को सीधे ‘सतर्कता’ में दर्ज किया जाता है।
  3. कार्रवाई की सिफारिश: यदि कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो यह समिति उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई या विभागीय जांच (Charge Sheet) के लिए राज्य सरकार को सीधे सिफारिश भेज सकती है।
  4. मासिक बैठक: नियम के मुताबिक, हर महीने इस समिति की कम से कम एक बैठक सवाई माधोपुर कलेक्टिवेट में होना अनिवार्य है।

तार्किक विश्लेषण: ‘ब्लॉक’ गंगापुर सिटी को ‘जिला’ समिति में इतना महत्व क्यों?

यहाँ एक बड़ा तार्किक और राजनीतिक सवाल यह उठता है कि जब गंगापुर सिटी अब जिला नहीं है, तो सवाई माधोपुर की जिला समिति में यहाँ के नेताओं को इतनी तरजीह क्यों दी गई? इसके पीछे 3 बड़े राजनीतिक कारण नजर आते हैं:

  • क्षेत्रीय असंतोष को थामना: गंगापुर सिटी का जिला दर्जा निरस्त होने के बाद स्थानीय स्तर पर जो एक राजनीतिक खालीपन या जनता में असंतोष की भावना थी, उसे साधने के लिए मुख्यमंत्री ने यह ‘मरहम’ लगाया है। यहाँ के स्थानीय नेताओं को जिला स्तर पर इतनी बड़ी पावर देकर यह संदेश दिया गया है कि विकास और प्रशासनिक नियंत्रण के मामले में गंगापुर सिटी उपेक्षित नहीं रहेगा।
  • शहरी और ग्रामीण प्रतिनिधित्व का संतुलन: मनोनीत सदस्यों में शिवरतन अग्रवाल (नगर परिषद सभापति) शहर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और मंजू गुर्जर (प्रधान) ग्रामीण ब्लॉक का। सरकारी नियमों का भी यही मापदंड है कि समिति में नगरीय और पंचायती राज दोनों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
  • अफसरशाही पर लगाम: जनप्रतिनिधि सीधे जनता के बीच से आते हैं। चूंकि ये पद ‘मानद’ (Honorary) होते हैं और इनमें कोई अतिरिक्त वेतन या सरकारी भत्ता नहीं मिलता, इसलिए यह ‘लाभ का पद’ नहीं है। लेकिन इनके माध्यम से सरकार ने जिला मुख्यालय (सवाई माधोपुर) पर बैठे बड़े अधिकारियों के सामने गंगापुर सिटी ब्लॉक की समस्याओं को मजबूती से उठाने वाले ‘वकील’ खड़े कर दिए हैं।

बयानों के पीछे का संकल्प: जानिए किसने क्या कहा?

मनोनयन के बाद सभी चारों नेताओं ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार जताते हुए कहा कि वे पूरी निष्ठा से जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे:

• शिवरतन अग्रवाल (सभापति): उन्होंने सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं पर जोर दिया, जिससे साफ है कि उनका फोकस शहरी क्षेत्र के विकास कार्यों को गति देने पर रहेगा।

• सुशील दीक्षित (पूर्व जिला अध्यक्ष): संगठन के इस पुराने चेहरे ने कहा कि सरकार ने जमीनी कार्यकर्ताओं को सम्मान देकर जिम्मेदारी बढ़ाई है।

• मंजू गुर्जर (प्रधान): उन्होंने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की समस्याओं को मुखरता से उठाने और अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति तक लाभ) की परिकल्पना को साकार करने का संकल्प लिया।

• जमना लाल वैष्णव (मोर्चा संयोजक): उन्होंने समिति के माध्यम से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में “पारदर्शिता और जवाबदेही” सुनिश्चित करने की बात कहकर लापरवाह अफसरों को सीधे सचेत कर दिया है।

संपादकीय निष्कर्ष (Editorial Verdict)

भले ही गंगापुर सिटी अब स्वतंत्र जिला न होकर सवाई माधोपुर जिले का एक ब्लॉक है, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जिला सतर्कता समिति में यहाँ के चार कद्दावर चेहरों को जगह देकर यह साफ कर दिया है कि सत्ता के केंद्र में गंगापुर सिटी की धमक कम नहीं होने दी जाएगी। सरकार ने अपने स्थानीय सिपहसालारों को जिला मुख्यालय पर अफसरों की क्लास लगाने की कानूनी चाबी सौंप दी है। अब देखना यह होगा कि ये मनोनीत सदस्य आने वाले दिनों में क्षेत्र की जनसमस्याओं का कितनी तेजी से निस्तारण करवा पाते हैं।

— रिपोर्ट: The Xposure News Channel
[ News Desk Gangapur ]

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