EXCLUSIVE INVESTIGATION | RAJASTHAN MEDICAL SCAM

FMGE पास किए बिना MBBS रजिस्ट्रेशन, 100+ संदिग्ध डॉक्टर रडार पर — राजस्थान के सबसे बड़े मेडिकल घोटाले का खुलासा

जयपुर/राजस्थान | 25 मार्च 2026: राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने प्रदेश में चल रहे एक ऐसे संगठित रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने चिकित्सा व्यवस्था की जड़ों को हिला दिया है। इस कार्रवाई में राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा सहित 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

जब ‘डॉक्टर’ बनना बन गया कारोबार

राजस्थान में एक ऐसा काला कारोबार चल रहा था, जहां ‘डॉक्टर’ बनने के लिए न तो योग्यता जरूरी थी और न ही परीक्षा पास करना। जरूरत थी तो सिर्फ पैसे की। 20 से 25 लाख रुपये देकर ऐसे लोगों को MBBS रजिस्ट्रेशन दिलाया जा रहा था, जिन्होंने जरूरी FMGE परीक्षा पास तक नहीं की थी।

यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का है।

9 जिलों में एक साथ SOG का ऑपरेशन

  • 22 टीमें गठित
  • 9 जिलों में एक साथ दबिश
  • 100+ पुलिसकर्मी शामिल

कार्रवाई जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, सीकर, झुंझुनूं, धौलपुर, कोटपूतली, अलवर और करौली में की गई। यह ऑपरेशन हफ्तों की निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग के बाद अंजाम दिया गया।

कौन हैं मुख्य आरोपी?

डॉ. राजेश शर्मा – तत्कालीन रजिस्ट्रार, RMC (मुख्य आरोपी)

अखिलेश माथुर – नोडल अधिकारी

1 दलाल + 15 फर्जी डॉक्टर

इन पर आरोप है कि इन्होंने जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन जारी किए।

फर्जीवाड़े का पूरा सिस्टम (Modus Operandi)

यह रैकेट बेहद संगठित तरीके से काम करता था:

  • विदेश से MBBS करने वाले छात्र (चीन, रूस, यूक्रेन आदि)
  • FMGE परीक्षा में फेल
  • दलालों से संपर्क
  • फर्जी FMGE सर्टिफिकेट तैयार
  • RMC में फर्जी वेरिफिकेशन
  • स्थायी रजिस्ट्रेशन जारी

रजिस्ट्रेशन मिलते ही ये अयोग्य लोग “डॉक्टर” बनकर मरीजों का इलाज करने लगे।

20 लाख में ‘डॉक्टर’ — पैसा कैसे बंटता था?

  • कुल डील: ₹20–25 लाख प्रति व्यक्ति
  • ₹10–12 लाख: काउंसिल अधिकारियों तक
  • बाकी: दलाल और नेटवर्क

अधिकांश लेनदेन नकद में किया गया, लेकिन SOG ने कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए पूरे नेटवर्क को ट्रैक किया।

इनको SOG ने गिरफ्तार कर लिया है

100+ संदिग्ध डॉक्टर रडार पर

जांच में अब तक:

  • 90+ फर्जी डॉक्टर चिन्हित
  • 100+ संदिग्ध जांच के घेरे में
  • राज्यभर के अस्पतालों में सेवाएं दे रहे थे

सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता

इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • क्या वेरिफिकेशन सिस्टम पूरी तरह फेल था?
  • क्या अंदरूनी मिलीभगत थी?
  • क्या अस्पतालों ने जांच नहीं की?

मरीजों के लिए कितना बड़ा खतरा?

यह मामला केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि “लाइसेंस टू किल” जैसा है।

इन फर्जी डॉक्टरों ने न जाने कितने मरीजों का इलाज किया होगा — यह अब जांच का सबसे संवेदनशील पहलू है।

📰 कैसे हुआ खुलासा?

इस घोटाले का खुलासा सबसे पहले मीडिया रिपोर्ट्स (दैनिक भास्कर) के माध्यम से हुआ। इसके बाद सरकार ने जांच कमेटी बनाई और अक्टूबर 2024 में डॉ. राजेश शर्मा को निलंबित किया गया।

कानूनी कार्रवाई

  • धोखाधड़ी (IPC)
  • जालसाजी
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम
  • मेडिकल नियमों का उल्लंघन

अब आगे क्या?

  • रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकते हैं
  • अस्पतालों की जांच होगी
  • फॉरेंसिक ऑडिट जारी

निष्कर्ष

जब स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे अहम संस्था में ही भ्रष्टाचार हो जाए, तो यह केवल एक घोटाला नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।

SOG की यह कार्रवाई शुरुआत है — आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!