EDUCATION BREAKING | RTE विवाद

बीकानेर में स्कूल संचालकों की बैठक, प्री-प्राइमरी में एडमिशन रोकने का सर्वसम्मति से निर्णय

बीकानेर: राजस्थान में RTE (Right to Education) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्राइवेट स्कूल संचालकों ने शिक्षा विभाग को खुली चुनौती देते हुए साफ कर दिया है कि जब तक सरकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं (PP3, PP4, PP5) के लिए भुगतान का स्पष्ट प्रावधान नहीं करेगी, तब तक इन कक्षाओं में प्रवेश नहीं दिए जाएंगे।

⭐ क्या है पूरा विवाद?

  • RTE के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का प्रावधान
  • सरकार को स्कूलों को भुगतान करना होता है
  • प्री-प्राइमरी कक्षाओं के भुगतान पर स्पष्ट नीति नहीं
  • स्कूलों का आरोप: सरकार भुगतान से बच रही है

📍 बीकानेर बैठक में क्या फैसला हुआ?

बीकानेर स्थित आनंद निकेतन में आयोजित बैठक में पैपा (Private Schools Association) के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल के नेतृत्व में प्राइवेट स्कूल संचालकों ने सर्वसम्मति से बड़ा निर्णय लिया।

मुख्य निर्णय:

“भुगतान नहीं तो प्रवेश नहीं”

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जब तक सरकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए भुगतान की व्यवस्था नहीं करती, तब तक राज्य का कोई भी प्राइवेट स्कूल इन कक्षाओं में एडमिशन नहीं देगा।

📨 सरकार को पहले ही दी जा चुकी चेतावनी

  • 17 मार्च 2026 को शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपा गया
  • 10 दिन का अल्टीमेटम दिया गया
  • समय सीमा के बाद आंदोलन की चेतावनी

⚖️ हाईकोर्ट का भी आया था आदेश

स्कूल संचालकों का कहना है कि 8 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से RTE के तहत भुगतान करने का आदेश दिया था।

इसके बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे स्कूल संचालकों में नाराजगी बढ़ गई है।

📊 पेंडिंग भुगतान बना सबसे बड़ा मुद्दा

  • 2025-26 सत्र का भुगतान अभी तक लंबित
  • पिछले वर्षों के भुगतान भी अटके
  • स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ा

बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी स्कूल संचालक मिलकर पेंडिंग भुगतान के लिए संघर्ष करेंगे।

👥 बैठक में किन-किन ने भाग लिया?

बैठक में प्रदेशभर के कई प्रमुख स्कूल संचालकों और शिक्षाविदों ने भाग लिया, जिनमें गिरिराज खैरीवाल, डॉ. अभय सिंह टाक, तरविन्दर सिंह कपूर, रविकांत पुरोहित, सौरभ बजाज सहित कई नाम शामिल रहे।

⚠️ आगे क्या हो सकता है?

  • प्री-प्राइमरी एडमिशन पूरी तरह रुक सकते हैं
  • सरकार और स्कूलों के बीच टकराव बढ़ सकता है
  • अभिभावकों और बच्चों पर सीधा असर पड़ेगा

🧠 बड़ा सवाल

अगर यह विवाद जल्द हल नहीं हुआ, तो इसका असर लाखों बच्चों की पढ़ाई और एडमिशन प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

यह मामला अब केवल भुगतान का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और नीति निर्माण की पारदर्शिता का भी बनता जा रहा है।

निष्कर्ष

RTE को लेकर प्राइवेट स्कूलों और सरकार के बीच बढ़ता यह टकराव आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन बन सकता है। “भुगतान नहीं तो प्रवेश नहीं” का नारा यह साफ संकेत देता है कि अब स्कूल संचालक पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

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