नफरत से नहीं, प्यार से नशे के खिलाफ जंग! सवाई माधोपुर पुलिस का ‘ड्रग वॉरियर’ अभियान शुरू, अब मोहल्ले और गांव बनेंगे नशामुक्त
सवाई माधोपुर, 8 अगस्त। नशा केवल एक व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में नहीं लेता, बल्कि धीरे-धीरे पूरे परिवार की खुशियां और सामाजिक ताना-बाना प्रभावित करता है। इसी सोच के साथ सवाई माधोपुर पुलिस ने नशे के खिलाफ एक अलग पहल ‘ड्रग वॉरियर’ अभियान शुरू किया है। अभियान का मूल मंत्र है- “नफरत से नहीं, प्रेम और अपनेपन से नशे के खिलाफ लड़ाई।”
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा की नशामुक्त राजस्थान की व्यापक मुहिम से जुड़े इस अभियान को आईजी प्रीति चंद्रा के निर्देशन तथा सवाई माधोपुर पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी के नेतृत्व में जिले में शुरू किया गया है।
नशे के खिलाफ लड़ाई में पुलिस के साथ पूरा समाज
‘ड्रग वॉरियर’ अभियान की खासियत यह है कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं माना गया है। अभियान में महिला, पुरुष, युवा, परिवार, डॉक्टर, शिक्षक और हर उस व्यक्ति को ड्रग वॉरियर बनने का आह्वान किया गया है, जो अपने परिवार और समाज को नशामुक्त देखना चाहता है। पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी के अनुसार अभियान का संदेश है— “पहले अपना परिवार, फिर मोहल्ला और फिर गांव।”
इसी क्रम में प्रत्येक नागरिक अपने आसपास नशे के कारोबार और नशे से पीड़ित लोगों की पहचान कर पुलिस तक सूचना पहुंचा सकता है।
नशे से पीड़ित व्यक्ति को अपराधी नहीं, अपनेपन की जरूरत
अभियान का सबसे मानवीय पक्ष नशे से पीड़ित लोगों के प्रति अपनाए गए दृष्टिकोण में दिखाई देता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति से नफरत करने के बजाय उसके जीवन और उसकी समस्या को समझें तथा उसे परिवार और समाज का सहयोग दें। नशामुक्ति की इस सोच में परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी गई है। परिवार यदि समय रहते अपने सदस्य की समस्या को पहचानकर सहायता और उपचार की दिशा में कदम उठाए, तो नशे की गिरफ्त से बाहर निकलने की राह आसान हो सकती है।
महिलाएं और युवा बनेंगे बदलाव के प्रहरी
अभियान में महिलाओं और युवाओं की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। मां, पत्नी, बहन या बेटी नशे से प्रभावित परिवार की स्थिति को सबसे करीब से महसूस करती हैं। इसी तरह युवा अपने परिवार और आसपास के वातावरण में बदलाव के प्रभावी वाहक बन सकते हैं।
नशे की समस्या से जूझ रहे परिवारों को आगे आने और पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि जरूरतमंद परिवारों को उचित सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सके।
स्कूल-कॉलेज भी बनेंगे नशामुक्त क्षेत्र
अभियान में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों से भी सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है। उनसे अपने विद्यालय और महाविद्यालय परिसर को नशामुक्त रखने तथा नशे से प्रभावित विद्यार्थियों और परिवारों को आवश्यक सहायता के लिए पुलिस तक पहुंचाने का आह्वान किया गया है। डॉक्टरों को भी अभियान का महत्वपूर्ण भागीदार बनाया गया है, ताकि नशामुक्ति के प्रयासों में पुलिस और चिकित्सा क्षेत्र मिलकर प्रभावी भूमिका निभा सकें।
5 से 25 लोगों की टोली बनाकर बन सकते हैं ‘ड्रग वॉरियर’
नागरिक 5, 10, 15, 20 अथवा 25 लोगों की टोली बनाकर अभियान से जुड़ सकते हैं। इसके लिए वे सीधे एसपी, एएसपी, डीएसपी, थानाधिकारी अथवा अपने बीट कांस्टेबल से संपर्क कर सकते हैं।
नशे के ठिकानों की गुप्त सूचना दें, पहचान रहेगी गोपनीय
अभियान के तहत नागरिक नशा तस्करी में शामिल लोगों और नशे के ठिकानों की गुप्त सूचना पुलिस को दे सकते हैं। पुलिस ने सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का भरोसा दिलाया है।
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‘नशामुक्त बीट’ बनेगी अभियान की पहचान
अभियान का एक अभिनव पहलू ‘नशामुक्त बीट’ की अवधारणा है।
जब किसी क्षेत्र के ड्रग वॉरियर यह सूचना देंगे कि उनके इलाके में नशे की बिक्री नहीं हो रही है, तो बीट कांस्टेबल और पुलिस की विशेष टीम द्वारा इसका सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के बाद संबंधित क्षेत्र को ‘नशामुक्त बीट’ का प्रमाण-पत्र दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
पहली नशामुक्त बीट को मिलेगा विशेष सम्मान
पहली नशामुक्त बीट को विशेष सम्मान दिया जाएगा।
सर्वाधिक नशामुक्त बीट तैयार करने वाले थानाधिकारी को भी विशेष सम्मान मिलेगा।
साथ ही संबंधित ड्रग वॉरियर परिवार और बीट कांस्टेबल को पुलिस अधीक्षक की ओर से प्रमाण-पत्र एवं सम्मान प्रदान किया जाएगा।
7 अगस्त से 7 सितंबर तक चलेगा पहला चरण
सवाई माधोपुर पुलिस का यह अभियान 7 अगस्त से 7 सितंबर तक पहले चरण में चलेगा।
अभियान का उद्देश्य केवल नशे के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पुलिस, परिवार और समाज को एक साथ जोड़कर नशे के खिलाफ सामाजिक माहौल तैयार करना है।
पुलिस का संदेश साफ—नशे के खिलाफ लड़ाई अकेले पुलिस की नहीं
‘ड्रग वॉरियर’ अभियान के जरिए सवाई माधोपुर पुलिस ने नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानने के बजाय सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की कोशिश की है। पुलिस का संदेश है कि बदलाव की शुरुआत कहीं दूर से नहीं, बल्कि अपने घर से होनी चाहिए।
पहले परिवार → फिर मोहल्ला → फिर गांव।
अब सवाई माधोपुर पुलिस की इस मुहिम की अगली बड़ी परीक्षा यही होगी कि कितने इलाके वास्तव में ‘नशामुक्त बीट’ बन पाते हैं।
