309 नगरीय निकायों में चुनावी नियम लागू; नई घोषणाओं, शिलान्यास-लोकार्पण और सरकारी प्रचार पर रहेगी नजर, जरूरी नागरिक सेवाएं चलती रहेंगी

जयपुर, 19 अगस्त। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव-2026 की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही संबंधित नगरीय निकाय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) प्रभावी हो जाएगी। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

आचार संहिता का सबसे बड़ा असर यह होगा कि चुनावी अवधि के दौरान सरकार, स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की ऐसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ जाएगी, जिनसे मतदाताओं को प्रभावित करने की संभावना हो। वहीं आम लोगों से जुड़ी नियमित और जरूरी नागरिक सेवाएं जारी रहेंगी।

सबसे जरूरी बात: आचार संहिता का मतलब यह नहीं है कि शहरों में सभी सरकारी काम बंद हो जाएंगे। पहले से स्वीकृत और नियमों के अनुसार चल रहे कार्य तथा आवश्यक सेवाएं परिस्थितियों और निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अधीन जारी रह सकती हैं।

आचार संहिता क्यों महत्वपूर्ण है?

आदर्श आचार संहिता का मूल उद्देश्य चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से कराना है। चुनाव की घोषणा के बाद सरकारी मशीनरी, सरकारी धन और प्रशासनिक संसाधनों का इस्तेमाल किसी दल या प्रत्याशी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए न हो, इस पर विशेष निगरानी रहती है।

क्या-क्या रुक सकता है?

1. नए शिलान्यास और उद्घाटन पर रोक

आचार संहिता लागू होने के बाद चुनावी क्षेत्र में ऐसी नई योजनाओं, परियोजनाओं, भवनों, सड़कों या अन्य विकास कार्यों के शिलान्यास, भूमिपूजन, उद्घाटन और लोकार्पण को लेकर प्रतिबंध लागू होंगे, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

यानी चुनावी माहौल में सरकारी उपलब्धियों को राजनीतिक प्रचार के रूप में पेश करने वाली गतिविधियों पर रोक रहेगी।

2. नई योजनाओं और घोषणाओं पर नजर

मंत्री, विधायक, महापौर, सभापति, पार्षद या अन्य जनप्रतिनिधि ऐसी नई वित्तीय योजना, अनुदान या लोक-लुभावन घोषणा नहीं कर सकेंगे, जिसका उद्देश्य या प्रभाव मतदाताओं को प्रभावित करना माना जा सकता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार की हर प्रशासनिक गतिविधि बंद हो जाएगी। मामला इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्णय चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करता है या सामान्य प्रशासनिक कार्य का हिस्सा है।

3. सरकारी विज्ञापन और प्रचार सामग्री हटेगी

सरकारी खर्च से सरकार, किसी राजनीतिक दल या किसी नेता की उपलब्धियों का प्रचार करने वाले होर्डिंग, पोस्टर, विज्ञापन और प्रचार सामग्री पर विशेष रोक रहेगी।

सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थानों पर लगी ऐसी सामग्री को निर्वाचन संबंधी निर्देशों के अनुसार हटाया जा सकता है।

4. नए टेंडर और वर्क ऑर्डर पर नियंत्रण

नगरीय निकायों में नए विकास कार्यों के लिए नए टेंडर जारी करने और नए वर्क ऑर्डर देने पर चुनावी आचार संहिता के तहत प्रतिबंध या नियंत्रण लागू रहेगा, जब तक निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार अनुमति न हो।

सीधा असर: चुनाव से ठीक पहले शुरू की जाने वाली नई विकास परियोजनाओं और नई घोषणाओं की प्रक्रिया अब निर्वाचन नियमों के दायरे में रहेगी।

लेकिन ये काम चलते रहेंगे

आचार संहिता लागू होने का अर्थ यह नहीं है कि नगर परिषद, नगरपालिका या नगर निगम की रोजमर्रा की व्यवस्था ठप हो जाएगी।

सफाई और कचरा संग्रहण जारी

शहरों में सफाई व्यवस्था और कचरा संग्रहण जैसी अनिवार्य सेवाएं जारी रहेंगी। चुनाव के कारण नागरिकों की बुनियादी सुविधाएं बंद नहीं की जातीं।

पेयजल आपूर्ति पर असर नहीं

नियमित पेयजल आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं को सामान्य रूप से जारी रखा जाएगा। पाइपलाइन में खराबी, पानी की आपूर्ति से जुड़ी समस्या या आवश्यक मरम्मत जैसे कार्यों को जनहित की जरूरत के अनुसार किया जा सकता है।

सीवरेज और स्ट्रीट लाइट की जरूरी मरम्मत

सीवरेज व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं से जुड़े आपातकालीन या जरूरी रखरखाव कार्य भी केवल आचार संहिता के नाम पर बंद नहीं होंगे।

पहले से शुरू हो चुके विकास कार्यों का क्या होगा?

यदि किसी विकास कार्य का वर्क ऑर्डर आचार संहिता लागू होने से पहले जारी हो चुका है और कार्य वास्तव में शुरू हो चुका है, तो वह कार्य सामान्यतः केवल आचार संहिता लगने के कारण स्वतः बंद नहीं हो जाता।

हालांकि कार्य के भुगतान, विस्तार, नए चरण, संशोधन या किसी नई प्रशासनिक स्वीकृति की स्थिति संबंधित निर्वाचन निर्देशों के अधीन हो सकती है।

इसलिए किसी भी परियोजना के मामले में यह देखना जरूरी होगा कि उसका वर्क ऑर्डर कब जारी हुआ, कार्य कब शुरू हुआ और चुनावी अवधि में उसके संबंध में कोई नया निर्णय तो नहीं लिया जा रहा।

आपदा या आपात स्थिति में सरकार काम कर सकेगी

आचार संहिता के बावजूद प्राकृतिक आपदा, स्वास्थ्य आपातकाल, कानून-व्यवस्था या अन्य गंभीर जनहित की परिस्थितियों में आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

यानी यदि शहर में अचानक बाढ़, भारी जलभराव, महामारी, आग, दुर्घटना या कोई अन्य गंभीर स्थिति पैदा होती है तो प्रशासन राहत और बचाव कार्यों से पीछे नहीं हटेगा।

तबादलों पर भी रहेगी निर्वाचन आयोग की नजर

चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण एवं पदस्थापन को लेकर भी चुनाव अवधि में विशेष नियंत्रण रहता है।

निर्वाचन कार्य से जुड़े अधिकारियों के तबादले या पोस्टिंग सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया की तरह नहीं किए जा सकते और आवश्यकता होने पर निर्वाचन आयोग की अनुमति एवं निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।

विधानसभा का काम पूरी तरह बंद नहीं होगा

आचार संहिता लागू होने का अर्थ यह भी नहीं है कि विधानसभा की विधायी प्रक्रिया पूरी तरह रुक जाएगी। विधानसभा में विधायी कार्य अपने संवैधानिक एवं नियमगत ढांचे के अनुसार हो सकते हैं।

हालांकि चुनावी क्षेत्रों के मतदाताओं को प्रभावित करने वाली घोषणाओं, प्रचार या सरकारी उपलब्धियों के राजनीतिक इस्तेमाल पर निर्वाचन संबंधी नियम लागू रहेंगे।

जनप्रतिनिधियों के लिए बदलेगा काम करने का तरीका

आचार संहिता लागू होने के बाद स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की गतिविधियां निर्वाचन नियमों के दायरे में आ जाएंगी।

अब किसी सड़क, सामुदायिक भवन, नाली, पार्क या अन्य परियोजना को लेकर नई घोषणा करके उसका राजनीतिक प्रचार करना आसान नहीं होगा। इसी तरह सरकारी संसाधनों और पद का इस्तेमाल किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल के पक्ष में करने पर भी निगरानी रहेगी।

एक नजर में—क्या बंद और क्या जारी?

गतिविधि स्थिति
नए शिलान्यास/लोकार्पण प्रतिबंध/नियंत्रण
नई लोक-लुभावन घोषणाएं प्रतिबंध
सरकारी उपलब्धियों का प्रचार रोक
नए विकास कार्य/वर्क ऑर्डर नियंत्रण/आयोग के निर्देश लागू
पहले से जारी कार्य आवश्यक नियमों के अधीन जारी
सफाई-कचरा संग्रहण जारी
पेयजल आपूर्ति जारी
जरूरी सीवरेज मरम्मत जारी
स्ट्रीट लाइट जैसी आवश्यक सेवाएं जारी
आपदा/आपात राहत कार्य आवश्यक निर्वाचन अनुमति/निर्देश के अधीन
चुनावी अधिकारियों के तबादले आयोग के निर्देश/अनुमति के अधीन
निष्कर्ष:
आचार संहिता लागू होने के बाद शहरों में जरूरी सेवाएं बंद नहीं होंगी, लेकिन नई राजनीतिक घोषणाओं, सरकारी प्रचार, नए विकास कार्यों और ऐसी गतिविधियों पर निर्वाचन नियमों की सख्त निगरानी रहेगी, जिनसे मतदाताओं को प्रभावित करने की संभावना हो।

संपादकीय सावधानी: “19 अगस्त 2026 को शाम 4 बजे” आचार संहिता लागू होने के सटीक समय को प्रकाशित करने से पहले राज्य निर्वाचन आयोग की उसी दिन जारी आधिकारिक चुनाव अधिसूचना/प्रेस नोट से एक बार मिलान कर लें।

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