2.44 करोड़ के नकली बीज घूसकांड पर बढ़ा सियासी घमासान, ACB पर FIR लीक करने और षड्यंत्र रचने का आरोप
जयपुर। राजस्थान के चर्चित नकली बीज घूसकांड ने शुक्रवार को नया मोड़ ले लिया, जब कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अचानक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) मुख्यालय पहुंच गए। वहां उन्होंने ACB के महानिदेशक (DG) से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी मांगी और दो टूक कहा—
“अगर मैं इस मामले में दोषी हूं तो मुझे गिरफ्तार कर लो।”
कृषि मंत्री के इस कदम ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। मंत्री ने न केवल खुद पर लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज किया, बल्कि ACB पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित षड्यंत्र बताया।
“अगर मैं इस मामले में दोषी हूं तो मुझे गिरफ्तार करो।”
“सच जानने आया हूं, दोषी हूं तो कार्रवाई करो”
ACB मुख्यालय के बाहर मीडिया से बातचीत में किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि वे पूरे मामले का सच जानने के लिए स्वयं ACB कार्यालय पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में उनकी कोई भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि FIR दर्ज होने से पहले ही उसका मजमून सोशल मीडिया और मीडिया संस्थानों तक पहुंच गया था, जिससे उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया।
FIR से पहले कैसे वायरल हो गई जानकारी?
कृषि मंत्री ने दावा किया कि ACB ने अपनी वेबसाइट पर FIR संख्या 155/2026 को 9 जून 2026 को दोपहर 1:30 बजे अपलोड किया, जबकि यह FIR 8 जून 2026 को रात 11:18 बजे दर्ज की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब FIR सार्वजनिक ही नहीं हुई थी, तब उसकी सामग्री मीडिया और सोशल मीडिया तक कैसे पहुंच गई।
ACB पर लगाया राजनीतिक हथियार बनने का आरोप
किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि उन्हें लगता है कि ACB किसी दबाव में काम कर रही है और उसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान उन्होंने DOIT, जल जीवन मिशन (JJM) और खाद्य विभाग से जुड़े कई कथित भ्रष्टाचार मामलों की शिकायतें ACB को भेजी थीं, लेकिन उन मामलों में आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।
“डॉक्टर और मंत्री कौन?” भ्रम दूर करने की मांग
कृषि मंत्री ने कहा कि FIR में एक “डॉक्टर” और एक “मंत्री” का उल्लेख किया गया है। चूंकि वे स्वयं डॉक्टर भी हैं और मंत्री भी, इसलिए आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है। उन्होंने ACB से सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की कि FIR में जिन डॉक्टर और मंत्री का जिक्र किया गया है, वे कौन हैं।
डोटासरा और गहलोत को मानहानि की चेतावनी
इस मामले में कांग्रेस नेताओं के बयानों पर भी किरोड़ी लाल मीणा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बिना सबूत उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं।
मीणा ने कहा कि यदि उनके पास कोई ठोस प्रमाण हैं तो सार्वजनिक करें, अन्यथा उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
सिटिंग जज से जांच की मांग
कृषि मंत्री ने कहा कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे मामले की जांच किसी सिटिंग जज से कराने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि FIR की जानकारी लीक होने से लेकर पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
क्या है 2.44 करोड़ का नकली बीज घूसकांड?
ACB ने हाल ही में राजस्थान बीज निगम के निदेशक जुगल किशोर विश्नोई और उनके भांजे के पास से करीब 2.44 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत राशि बरामद की थी। जांच एजेंसी के अनुसार यह रकम गुजरात की एक बीज कंपनी से ली गई थी।
इस मामले में ACB ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। ये वे लोग बताए जा रहे हैं जो कृषि मंत्री की छापेमारी के दौरान मौजूद रहते थे। इसी घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
FIR में “डॉक्टर” और “मंत्री” शब्दों के उल्लेख के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस लगातार मंत्री की भूमिका की जांच की मांग कर रही है, जबकि किरोड़ी लाल मीणा इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बता रहे हैं।
अब आगे क्या?
कृषि मंत्री के सीधे ACB मुख्यालय पहुंचने और खुद को जांच के लिए प्रस्तुत करने के बाद यह मामला अब केवल भ्रष्टाचार जांच तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल बन गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और ACB इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।
