राजस्थान पंचायत और निकाय चुनाव विवाद

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव नहीं, पूर्व विधायक संयम लोढ़ा पहुंचे कोर्ट

जयपुर: राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव को लेकर बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। हाईकोर्ट द्वारा तय समय सीमा के बावजूद चुनाव नहीं होने पर राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है।

📊 पूरा मामला समझिए

  • क्या हुआ: चुनाव में देरी पर अवमानना याचिका दायर
  • किसके खिलाफ: राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग
  • किसने दायर की: पूर्व विधायक संयम लोढ़ा
  • कहाँ: राजस्थान हाईकोर्ट
  • कब: मार्च 2026 (ताजा घटनाक्रम)
  • क्यों: 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश की पालना नहीं

⚖ कोर्ट ने क्या आदेश दिए थे

राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को स्पष्ट आदेश दिया था कि राज्य में पंचायत और नगर निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक कराए जाएं। 2

इसके अलावा सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया गया था। 3

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा और राज्य सरकार ने अदालत में समय सीमा तक चुनाव कराने का आश्वासन दिया था। 4

❗ फिर विवाद क्यों हुआ?

सबसे बड़ा विवाद यह है कि:

  • अभी तक चुनाव की तारीख घोषित नहीं हुई
  • मतदाता सूची का फाइनल प्रोग्राम 22 अप्रैल तक रखा गया
  • इससे साफ है कि 15 अप्रैल तक चुनाव संभव नहीं

यही बात अवमानना याचिका का आधार बनी है।

📊 घटनाक्रम की टाइमलाइन

  • 14 नवंबर 2025: हाईकोर्ट ने चुनाव 15 अप्रैल तक कराने के आदेश दिए
  • 31 दिसंबर 2025: परिसीमन पूरा करने की डेडलाइन
  • जनवरी–मार्च 2026: चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं
  • मार्च 2026: मतदाता सूची 22 अप्रैल तक तय
  • अब: अवमानना याचिका दायर

🧭 याचिकाकर्ता का आरोप

पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने जानबूझकर अदालत के आदेश की पालना नहीं की है।

उन्होंने पहले सरकार और आयोग को नोटिस देकर कार्यक्रम बदलने की मांग की थी, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी। 5

⚠ बड़ा संवैधानिक सवाल

यदि तय समय पर चुनाव नहीं होते:

  • यह अदालत की अवमानना मानी जा सकती है
  • सरकार और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो सकती है
  • संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल उठेंगे

📊 असली कारण क्या बताया जा रहा है

सूत्रों के अनुसार चुनाव में देरी का मुख्य कारण OBC आरक्षण रिपोर्ट है, जो अभी तक पूरी नहीं हुई है। 6

हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि बिना OBC रिपोर्ट के भी चुनाव कराए जा सकते हैं, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों में कहा गया है। 7

🔎 आगे क्या होगा?

अब यह मामला अदालत में है। यदि कोर्ट को लगता है कि आदेश की अवहेलना हुई है, तो:

  • सरकार को जवाब देना होगा
  • अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है
  • चुनाव जल्द कराने का आदेश फिर से आ सकता है

निष्कर्ष

राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि संवैधानिक और कानूनी विवाद बन चुका है। आने वाले दिनों में अदालत का रुख तय करेगा कि चुनाव कब होंगे और देरी के लिए जिम्मेदार कौन होगा।

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